चुनाव की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले भाजपा से निलंबित राजेंद्र राठौड़ अपने गृहजिले चूरू की नगर परिषद चुनाव में फिर बाजी मारते दिखाई दे रह हैं। एक तो उन्होंने अपने चहेते रमाकांत ओझा को कमजोर दावेदारी और घटते जनाधार के बावजूद पार्टी का टिकट दिलवा दिया और दूसरे अब विजय श्री भी ओझा को ही मिलती दिख रही है। इसमें भी राठौड़ साहब की ही करामात दिखती है। भाजपा के तो खैर निलंबित ही सही, वे नेता है लेकिन ज्यादा बड़ी करामात तो उनके द्वारा कांग्रेस की टिकट दिलवाने को माना जा रहा है। चूरू के मौजूदा विधायक पुत्र और राजेंद्र राठौड़ के आपसी संबंधों की बात हमेशा से होती रही है, मौके-बेमौके इस बात को दोनों ने स्वीकारा भी है। कांग्रेस द्वारा गोविंद महनसरिया को टिकट दिए जाने से यह साबित हो गया है कि कांग्रस विधायक पुत्र पर भी राठौड़ साहब की पकड़ उतनी ही बरकरार है। शायद यही वजह है कि कांग्रेस ने हारने के लिए अपने प्रत्याशी को खड़ा कर दिया है और चुनाव जीता देने वाले कांग्रेसी कार्यकर्ता टिकट की कतार में खड़े देखते ही रह गए। दूसरे उम्मीदवार भी मैदान में इस तरह के हैं, जिन्हें देखकर कहा जा सकता है कि अब रमाकांत ओझा की जीत में कोई शक नहीं। आगे, खुदा जाने...
Sunday, November 15, 2009
फिर मारी बाजी
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