बाल ठाकरे को खुश करने के लिए सचिन तेंदुलकर के खिलाफ जहर उगल रहे संजय राउत किसको फंसा रहे हैं और किसको बरी कर रहे हैं, शायद खुद उन्हें ही नहीं मालूम। सचिन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने मराठी खिलाड़ियों की मदद नहीं की और सुनील गावस्कर की सराहना इस बात के लिए की है कि अपनी टीम में मराठी खिलाड़ियों के लिए जगह बनाए रखी। कमजोर से कमजोर समझ वाला आदमी भी समझ सकता है कि अगर संजय राउत हरिश्चंद्र हैं तो फिर सचिन अपनी जगह एकदम ठीक है। ... और यह भी कि अपनी टीम में मराठियों को ही वरीयता देने दिलाने के लिए सुनील गावस्कर कठघरे में खड़े हो गए हैं समूचे हिंदुस्थानियों के दिमाग में बाल ठाकरे और संजय राउत के बयानों की सचिन की छवि को और ही मजबूत हुई है। ये बात और है कि सुनील गावस्कर हिंदुस्थानियों के विलेन के रूप में स्थापित हो जाएंगे अगर वे संजय राउत के बयानों पर चुप रहते हैं तो। ... और बोलेंगे तो ? शिवसेना के सामने बोलने के लिए तो शेर का कलेजा चाहिए ? देखते हैं आगे आगे होता है क्या ?
Monday, November 23, 2009
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